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Wednesday, 16 December 2015

इससे रहें दूर, वरना सिकुड़ सकता है आपका दिमाग

डिप्रेशन से रहें दूर, वरना सिकुड़ सकता है आपका दिमाग

वाशिंगटन : अवसादग्रस्त व्यक्ति के दिमाग का हिपोकैंपस छोटा हो जाता है। यह खुलासा एक अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन में हुआ है। हिपोकैंपस स्मरण और विभिन्न भावनाओं के लिए जिम्मेदार होता है। अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक इस खुलासे से यह समझ में आता है कि किशोरों में अवसाद का तुरंत इलाज होना चाहिए।
अध्ययनकर्ताओं ने यह भी कहा है कि यदि अवसाद का इलाज हो जाए, तो हिपोकैंपस वापस अपने सामान्य आकार में आ जाता है। अध्ययन दल के सदस्य और सिडनी विश्वविद्यालय के ब्रेन एंड माइंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के हिकी ने कहा, 'कोई व्यक्ति जितनी अधिक बार अवसाद की चपेट में आता है, उतना ही उसके हिपोकैंपस का आकार सिकुड़ता जाता है।'
समाचार पत्र गार्जियन के मुताबिक, यह अध्ययन दुनियाभर के 15 शोध संस्थानों ने मिलकर किया है। इसमें 8,927 लोगों पर अध्ययन किया गया, जिसमें 1,728 लोग गहरे तौर पर अवसादग्रस्त थे। बाकी लोग स्वस्थ्य थे। शोधार्थियों ने पाया कि 65 फीसदी अवसादग्रस्त लोग ऐसे थे, जो बार-बार अवसादग्रस्त हुए थे। और इन लोगों का हिपोकैंपस दूसरों की अपेक्षा छोटा था।
हिकी ने कहा, 'यदि व्यक्ति बार-बार अवसादग्रस्त हो रहा है और उसका इलाज नहीं हो पा रहा है, तो उसके हिपोकैंपस अधिक क्षतिग्रस्त होता जाता है। सिर्फ दवा से अवसाद का प्रभावी इलाज नहीं हो सकता है। सामाजिक मदद की भी जरूरत होती है।' अध्ययन में कहा गया है, 'किशोरों में अवसाद का इलाज करने के लिए पहले मानसिक चिकित्सा का सहारा लिया जाना चाहिए।'

Wednesday, 9 December 2015

जनरेटर फटा, सिर में घुसा आधा किलो लोहे का टुकड़ा, ऑपरेशन कर निकाला

जनरेटर फटा, सिर में घुसा आधा किलो लोहे का टुकड़ा, ऑपरेशन कर निकाला

कोटा . । शहर के झालावाड़ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन कर करीब आधा किलो लोहे का टुकड़ा सिर से निकाला गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर है। न्यूरो सर्जन डॉ. कृष्णहरि शर्मा ने बताया कि आजाद नगर इन्द्रगढ़ बूंदी में सोमवार सुबह हीरालाल (45) खेत पर काम कर रहा था। अचानक पानी खींच रहे जनरेटर में खराबी आ गई।
हीरालाल पास गया तो जनरेटर फट गया। इससे लोहे का तिकोना टुकड़ा हीरालाल की आंख और नाक को चीरता हुआ सिर के दांयी तरफ घुस गया। मरीज को पहले बूंदी अस्पताल ले जाया गया, वहां से कोटा लाया गया। सुधा अस्पताल में सोमवार शाम को ऑपरेशन किया गया।
डॉ. शर्मा ने बताया कि टुकड़ा हड्डियों के बीच ऐसे फंसा था कि सिर के ऊपरी हिस्से से पहले इसे ढीला करना पड़ा, इसके बाद बाहर से खींचते हुए निकाला गया। इसके साथ ही सिर में जमा खून के थक्के को भी हटाया गया। टुकड़े का वजन करीब आधा किलो है और 7 गुणा 5 गुणा 2 सेमी का आकार है। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर है।
मस्तिष्क को क्षति पहुंची है। मरीज की आंख पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। मस्तिष्क में हुई क्षति के शरीर पर क्या असर होते हैं यह मरीज के होश में आने पर ही पता चल सकेगा। मरीज को ठीक होने में दो सप्ताह तक का समय लग सकता है।